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मेडिकल रोड” या मौत का रास्ता? अस्पताल पहुंचने से पहले ही दर्द से कराह रहे मरीज

Ravindr kumar rana 25 May 2026, 04:05 PM 40 views
मेडिकल रोड” या मौत का रास्ता? अस्पताल पहुंचने से पहले ही दर्द से कराह रहे मरीज
बस स्टैंड से आनंदा चौक होते हुए सदर अस्पताल तक की जर्जर सड़क बनी गर्भवती महिलाओं, मरीजों और एंबुलेंस के लिए जानलेवा मुसीबत
हजारीबाग शहर की जीवनरेखा मानी जाने वाली बस स्टैंड से आनंदा चौक होते हुए सदर अस्पताल तक जाने वाली सड़क आज बदहाली, लापरवाही और प्रशासनिक संवेदनहीनता की दर्दनाक कहानी बयां कर रही है। लोगों की जुबान पर अब एक ही सवाल है — क्या यह “मेडिकल रोड” है या “मौत का रास्ता”? हर दिन इसी सड़क से एंबुलेंस सायरन बजाते हुए गंभीर मरीजों को सदर अस्पताल पहुंचाती है। गर्भवती महिलाएं प्रसव और इलाज के लिए इसी रास्ते से गुजरती हैं, लेकिन सड़क की हालत ऐसी हो चुकी है कि सफर इलाज से ज्यादा तकलीफदेह बन गया है। जगह-जगह बने बड़े गड्ढे, उखड़ी सड़क और कीचड़ से भरा रास्ता मरीजों की पीड़ा को कई गुना बढ़ा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एंबुलेंस जब इस सड़क से गुजरती है तो मरीज दर्द से कराह उठते हैं। गर्भवती महिलाओं को लेकर आने वाले परिजन डर और चिंता में रहते हैं कि कहीं रास्ते में ही कोई अनहोनी न हो जाए। कई लोगों ने तो यहां तक कहा कि इस सड़क पर चलते हुए ऐसा लगता है मानो प्रसव अस्पताल पहुंचने से पहले ही सड़क पर हो जाएगा। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस सड़क का सीधा संबंध सदर अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र से है, उसकी ऐसी दुर्दशा आखिर क्यों? क्या जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की नजर इस सड़क पर नहीं पड़ती? चुनाव के दौरान विकास और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे करने वाले नेता आखिर जनता की इस पीड़ा पर चुप क्यों हैं? हजारीबाग की जनता अब सवाल पूछ रही है — क्या उनका वोट सिर्फ चुनावी भाषण सुनने के लिए था? क्या मरीजों और गर्भवती महिलाओं की जान जोखिम में डालकर विकास का दावा किया जाएगा? क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन जागेगा? स्थानीय लोगों में इस समस्या को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि जल्द सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाएगा। लोगों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से तत्काल सड़क निर्माण और मरम्मत की मांग की है। यह सिर्फ एक सड़क की बदहाली नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता की तस्वीर है। अब देखना यह होगा कि आखिर कब जागेंगे जिम्मेदार और कब मिलेगी हजारीबाग की जनता को इस दर्दनाक समस्या से राहत।