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हजारीबाग का कथित IPL सट्टा सिंडिकेट! नामों के खुलासे के बाद पुलिस भी सवालों के घेरे में?

Ravindr kumar rana 02 Jun 2026, 05:22 AM 196 views
हजारीबाग का कथित IPL सट्टा सिंडिकेट! नामों के खुलासे के बाद पुलिस भी सवालों के घेरे में?
हिरासत, कथित सौदेबाजी और करोड़ों की संपत्ति पर उठे सवाल... आखिर सच क्या है?
हजारीबाग में कथित IPL सट्टा सिंडिकेट को लेकर एक स्थानीय समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट ने पूरे शहर में नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट में किए गए दावों के बाद अब सिर्फ सट्टा कारोबार ही नहीं, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पेलावल पुलिस ने IPL सट्टा कारोबार से जुड़े होने के संदेह में कुछ लोगों को हिरासत में लिया था। पूछताछ के दौरान कई नए नाम सामने आने का दावा किया गया है। इनमें शशि साव, सूरज साव और कुणाल शर्मा के नाम चर्चा में हैं। सूत्रों के अनुसार, शशि साव और सूरज साव सगे भाई बताए जा रहे हैं, जिनकी शुरुआत कभी हजारीबाग के डेली मार्केट में एक छोटी मसाले की दुकान से हुई थी। लेकिन अब उनके पास करोड़ों की संपत्ति होने की चर्चाएं शहर में जोरों पर हैं। वहीं कुणाल शर्मा को कानीबाजार का निवासी बताया जा रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बाद में हिरासत में लिए गए लोगों को लोहसिंघना थाना लाया गया, जहां बंद कमरे में कथित बातचीत और आर्थिक लेन-देन को लेकर चर्चाएं शुरू हुईं। इतना ही नहीं, एक कथित समझौते और भविष्य में मासिक भुगतान व्यवस्था तय किए जाने जैसी बातें भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं। हालांकि इन सभी दावों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही पुलिस प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट बयान सामने आया है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि संबंधित लोगों को किसी अन्य मामले में पूछताछ के लिए लाया गया था। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर रिपोर्ट में किए गए दावे सही हैं, तो आखिर इतने बड़े कथित नेटवर्क पर अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि दावे गलत हैं, तो फिर इन चर्चाओं पर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जा रही? अब हजारीबाग में एक ही मांग तेजी से उठ रही है—पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच हो, ताकि सच सामने आ सके और जनता के मन में उठ रहे सवालों का जवाब मिल सके। फिलहाल इस पूरे मामले पर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है, लेकिन शहर की निगाहें अब प्रशासन और जांच एजेंसियों पर टिकी हुई हैं। "क्या हजारीबाग में सचमुच कोई बड़ा कथित सट्टा नेटवर्क सक्रिय था? क्या पुलिस पर उठ रहे सवालों की जांच होगी? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।"