झारखंड
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हजारीबाग सदर अस्पताल में ट्रैफिक व्यवस्था बेपटरी, आधे घंटे तक जाम में फंसी एंबुलेंस
होमगार्ड की मौजूदगी के बावजूद मरीजों के परिजनों ने खुद संभाली जाम की कमान, व्यवस्था पर उठे सवाल
हजारीबाग। सदर अस्पताल परिसर में गुरुवार को ट्रैफिक जाम की स्थिति ने अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। अस्पताल परिसर में लगे जाम के कारण एक एंबुलेंस करीब आधे घंटे तक फंसी रही। एंबुलेंस में मरीज होने की स्थिति में इतनी देर तक रास्ता बाधित रहना अस्पताल की ट्रैफिक व्यवस्था की गंभीरता को सामने लाता है।
जानकारी के अनुसार, सदर अस्पताल परिसर में वाहनों की आवाजाही और बेतरतीब खड़े वाहनों के कारण जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई। देखते ही देखते एंबुलेंस भी जाम में फंस गई। एंबुलेंस को रास्ता दिलाने के लिए अस्पताल में मौजूद मरीजों और उनके परिजनों ने खुद आगे बढ़कर काफी प्रयास किया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अस्पताल परिसर में ट्रैफिक व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए होमगार्ड जवानों की मौजूदगी के बावजूद मरीजों और उनके परिजनों को खुद जाम छुड़ाने के लिए क्यों आगे आना पड़ा? यदि किसी एंबुलेंस में गंभीर मरीज हो और उसे तत्काल इलाज की जरूरत हो, तो आधे घंटे की देरी उसके लिए कितनी भारी पड़ सकती है, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
सदर अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन पहुंचते हैं। ऐसे में अस्पताल परिसर में एंबुलेंस के लिए रास्ता हर समय सुगम और बाधामुक्त रखना बेहद जरूरी है। लेकिन जाम में एंबुलेंस के फंसने की घटना ने अस्पताल की मौजूदा ट्रैफिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अस्पताल प्रशासन को चाहिए कि एंबुलेंस के लिए अलग और हमेशा खाली मार्ग सुनिश्चित किया जाए, साथ ही अस्पताल परिसर में वाहनों की पार्किंग और आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था की जाए। ड्यूटी पर तैनात कर्मियों की जिम्मेदारी भी तय हो, ताकि भविष्य में किसी आपात स्थिति में एंबुलेंस को जाम का सामना न करना पड़े।
सवाल सीधा है—जब मरीज की जिंदगी बचाने के लिए एंबुलेंस दौड़ती है, तो सदर अस्पताल पहुंचने के बाद उसे जाम में क्यों रुकना पड़े?